हज़रत सूफ़ी मोहम्मद निज़ामुद्दीन नक़्शबंदी रहमतुल्लाह अलैह

 

हज़रत सूफ़ी मोहम्मद निज़ामुद्दीन नक़्शबंदी रहमतुल्लाह अलैह

हज़रत सूफ़ी मोहम्मद निज़ामुद्दीन नक़्शबंदी रहमतुल्लाह अलैह एक महान आलिम, साहिब-ए-तसव्वुफ़ और सिलसिला-ए-नक़्शबंदिया के बुज़ुर्ग थे। आपके पूर्वज मुग़ल वंश के अंतिम सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र की फ़ौज में सैनिक थे। 1857 के बाद अंग्रेज़ी हुकूमत के ज़ुल्म व सितम से बचने हेतु आपके वालिद जनाब शेख मोहम्मद उसमान साहब दिल्ली से महाराष्ट्र आए। प्रारंभ में अमरावती ज़िले के मंगरूल दस्तगीर में पटेल साहब के यहाँ मुहाफ़िज़ रहे, तत्पश्चात वर्धा ज़िले के देऊवाड़ा में बसकर खेती को अपना पेशा बनाया।

हज़रत का जन्म 1921 ई. में हुआ। आपने एक इल्मी और नूरानी माहौल में तालीम व तरबियत पाई। गाँव में उर्दू स्कूल न होने के कारण प्रारंभिक शिक्षा हेतु आपको मंगरूल दस्तगीर भेजा गया। उस दौर के प्रसिद्ध रूहानी बुज़ुर्ग हज़रत मुस्तफ़ा ख़ान क़ादरी से आपके घराने का गहरा रूहानी ताल्लुक़ रहा। आपके निकाह का निर्णय भी आपके पीर-ओ-मुरशिद की हिदायत पर उनकी नवासी मोहतरमा असगरी बेगम से सम्पन्न हुआ।

आपने आर्वी  तहसील के मोहल्ला उलापुर की मस्जिद में इमामत की और वहीं हज़रत अल्हाज सूफ़ी अब्दुल रहीम शाह सिद्दीकी नक़्शबंदी के हाथ पर बैअत की। सख़्त मुजाहिदात, नफ़्स-कुशी और रूहानी तालीम के बाद, पीर के हुक्म से 40 वर्ष की आयु में जामिया अरबिया, नागपुर में दाख़िला लिया। आपने फ़ारसी, हदीस और दर्स-ए-निज़ामी की तालीम अपने समय के जलीलुल-क़द्र उलेमा से हासिल की और सात वर्ष की तालीम के बाद दस्तार-ए-फ़ज़ीलत से नवाज़े गए। इसके पश्चात आपके पीर-ओ-मुरशिद ने आपको ख़िलाफ़त अता फ़रमाई।

दीनी ख़िदमात

आपने पश्चिम नागपुर क्षेत्र में अहले-सुन्नत की बड़ी ख़िदमत अंजाम दी। वहाबियत के ख़िलाफ़ मज़बूती से डटे रहे और इस क्षेत्र में चार मस्जिदों की तामीर करवाई। दीन-ए-हक़ की हिफ़ाज़त हेतु आपने वहाबीवाद के विरुद्ध मुबाहिले का भी एलान किया। आज देशभर में आपके अनगिनत मुरीदीन मौजूद हैं।

विसाल और मज़ार

हज़रत ने 104 वर्ष की आयु में 29 जमादिल आख़िर 1445 हिजरी (22 जनवरी 2023) को विसाल फ़रमाया। आपका मज़ार मुबारक नागपुर से 23 किलोमीटर दूर, सावनेर रोड स्थित पाटनसावनगी गाँव में ख्वाजा जी की बाड़ी में मरकज़-ए-अक़ीदत बना हुआ है।

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